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अनुप्रहरण

विकिशब्दकोशः तः

यन्त्रोपारोपितकोशांशः

[सम्पाद्यताम्]

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

अनुप्रहरण/ अनु-प्रहरण n. throwing into the fire S3Br. etc.

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

अनुप्रहरण न.
(अनु + प्र + हृ + ल्युट्) अगिन् में एक कर्मकाण्डीय द्रव्य (तत्त्व) का प्रक्षेपण (फेंकना), श्रौ.प.नि. 73.446। अनुप्रहृ (अगिन्) में फेंकना, मा.श्रौ.सू. 1.1.2.33; शां.श्रौ.सू. 4.18.5; भा.श्रौ.सू. 6.13.12; (परिधीन् अनुप्रहरति), का.श्रौ.सू. 3.6.16; तु. अनुप्रास (IVP); का.श्रौ.सू. 6.6.26 (अगिन् में वपाश्रपणी को फेंकना)। अनुप्रहावयति (अनु + प्र + हु + णिच् + तिप् लट्) (शृतदधि का) आहवनीय अगिन् के ऊपर बहाना, भा.श्रौ.सू. 11.1०.15। अनुप्राणिति (अनु + प्र + अन् + लट् तिप्) साँस को बाहर निकालता है, भा.श्रौ.सू. 3.13.13 (हुत्वा---); ‘वायुं नासिकाभ्यां निष्क्रामयति; (टीका -5 बौ.श्रौ.सू. 1०.31 ः 29.5 = अभि-व्यनिति। अनुप्रोहति (अनु + प्र + ऊह् + लट् तिप्) के अनुसार धारणा बनाता है, मन में धारण करता है, भा.श्रौ.सू. 1.23.7; आप.श्रौ.सू. 14.19.11। अनुप्रोह्य (अनु + प्र + ऊह् + ल्यप्) के अनुसार धारणा बनाकर, आप.श्रौ.सू. 1.21.7। अनु (?नू)बन्ध्या स्त्री. आलभ्य = वध्य पशु, सामान्यतया पशु-याग में वन्ध्या गाय अर्पित की जाती है, जो (कृत्य) सोमयाग में उदयनीय का अनुसरण करता है (उदयनीय के पश्चात् सम्पन्न किया जाता है), ला.श्रौ.सू. 1.6.42।

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