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उपांशुग्रह

विकिशब्दकोशः तः

यन्त्रोपारोपितकोशांशः

[सम्पाद्यताम्]

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

उपांशुग्रह/ उपांशु--ग्रह m. the first ग्रहor ladle-full of सोमpressed out at a sacrifice TS. S3Br. etc.

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

उपांशुग्रह पु.
सोमयाग के प्रातः सवन में सूर्योदय के पूर्व किये जाने वाले प्रथम सोम-निष्पीडन का नाम यह बिना पाठ के ही सम्पन्न किया जाता है, कुछ यजुषों को छोड़कर जो मौनावस्था में बिना साँस लिए बुदबुदाई जाती है, आप.श्रौ.सू. 12.1.7; तुल. इग्ग्लिंग, श.ब्रा.इ. XXVI. 244. एक प्याले उपस्थान उपांशुग्रह 177 के लिए पर्याप्त सोम की कुछ टहनियां ढेर में से निकाली जाती है और सवन-चर्म पर रख दी जाती है और उनके उपर होतृ-चमस में से ‘निग्राभ्य’ जल छिड़का जाता है। इसके बाद ये टहनियां उपांशु-सवन नामक पत्थर से क्रमशः 8, 11 एवं 12 प्रहार की तीन आवृत्तियों में दबायी जाती है। निस्सारित रस हस्त-विवर से सीधे प्याले या पात्र में, इसमें बिना पवित्रा रखे ही उड़ेल दिया जाता है, आप.श्रौ.सू. 12.9.1-11. यह सवन क्षुल्लकाभिषव कहा जाता है (लघुसवन); VH I49 महासवन जो इसके शीघ्र बाद आता है, से भेद बतलाने के लिए।

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