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क्रतुकरण

विकिशब्दकोशः तः

यन्त्रोपारोपितकोशांशः

[सम्पाद्यताम्]

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

क्रतुकरण/ क्रतु--करण n. N. of a sacrificial offering A1pS3r. xii , 6 , 5 and iv , 1 , 5.

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

क्रतुकरण पु.
एक कृत्य का नाम, जिसके द्वारा एक सोम याग का दूसरे सोम याग से वैभिन्न्य ज्ञात होता है (रु. क्रतुव्यावृत्तिः क्रियते अनेन इति), आप.श्रौ.सू. 12.6.5; यदि यह अगिन्ष्टोम हो, तो ‘प्रचरणी’ के अवशेष अगिन् में हुत कर दिये जाते हैं; यदि उक्थ्य हो तो उनका परिधि पर अञ्जन (लेप) होता है, यदि षोडशी हो, तो वह आहुति देता है, अवशेष का परिधि में अञ्जन करता है और ‘द्रोणकलश’ तथा ‘रराटी’ का स्पर्श करता है, वाजपेय एवं अतिरात्र में इसकी न आहुति दी जाती है और न ही (परिधि में) अञ्जन होता है। वह साधारण ढंग से ‘एतन् नमुर्-’ आदि मन्त्र पढ़ता है एवं हविराधानमण्डप में आ जाता है, आप.श्रौ.सू. 12.6.8; बौ.श्रौ.सू. 7.4.2; भा.श्रौ.सू. 13.5.7, आपि; न. ‘यमगन्े पृत्नु मर्त्यम्’ (तै.सं. 1.3.13.2) इस ऋचा के साथ ‘अगिन्ष्टोम’ संज्ञक सोमयाग में दी जाने वाली एक आहुति का नाम, श्रौ.को. (अं.) 1.ii.946=होम, श्रौ. प.नि. 256-262 केशवर्जम् क्रतुकरण 210

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