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परिवप्य

विकिशब्दकोशः तः

यन्त्रोपारोपितकोशांशः

[सम्पाद्यताम्]

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

परिवप्य/ परि-वप्य m. (fr. वपा)the होमwhich begins and concludes the rites to be performed with the caul or omentum A1pS3r. etc. ( w.r. -वाप्य).

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

परिवप्य पु.
वह होम, जो वपा की झिल्ली से अनुष्ठित होने वाले कृत्यों का आरम्भ एवं समापन करता है, आप.श्रौ.सू. 14.7.5; ‘स्वाहा देवेभ्यः’ इस मन्त्र से ‘आज्यभाग’ आहुतियां प्रदान करने के पश्चात् दी जाने वाली दो घृताहुतियों का नाम, प्रथम आहुति वपाहोम के पूर्व एवं दूसरी ‘वपा-होम’ के बाद, भा.श्रौ.सू. 7.15.15; 7.16.9 (उभयतो वपाम्)। परिवसेत् (परि + वस् + वि.लि. प्र.पु.ए.व.) (प्रणयन की) प्रक्रिया का समापन अथवा अन्त करना चाहिए, भा.श्रौ.सू. 7.4.5 (प्रोक्षन्तं परिवसेत् इति अपरम्); द्रष्टव्य-7.6.1।

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