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प्रतिनिग्राह्य

विकिशब्दकोशः तः

यन्त्रोपारोपितकोशांशः

[सम्पाद्यताम्]

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

प्रतिनिग्राह्य/ प्रति- mfn. to be ladled out A1pS3r. (See. निर्ग्र्).

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

प्रतिनिग्राह्य पु.
(प्रति + नि + ग्रह् + ण्यत्) नियमित सोम के प्याले के प्रसङ्ग में संगत द्रव (अथवा सोम का प्याला) जिसे द्रोण कलश से लिया जाता है एवं बिना ढूह पर रखे आहुति के रूप में अर्पित किया जाता है। इसे आहरण- चम्मच से लेना होता है एवम् आघार के तरीके से परिधि के दक्षिणी जोड़ से उत्तर वेदि के उत्तर-पूर्व कोण तक अर्पित किया जाता है, अर्थात् ‘उपांशु’ संज्ञक प्याले की प्रविधि से, भा.श्रौ.सू. 13.22.1-23.4; आप.श्रौ.सू. 12.21.1०; 12.21.22; 12.2०.19 मा.श्रौ.सू. 2.3.8.2; हि.श्रौ.सू. 8.6.19; तुल. प्रतिग्राह्य, बौ.श्रौ.सू. 21.9.21; द्रष्टव्य-प्रतिनिग्राह्य, बौ.श्रौ.सू. 25.2०; रु - आप.श्रौ.सू. 12.2०.19 पर, चि.भा.से. ः एक सोमाहरण का नाम, जिसे करछुल से निकाला या ग्रहण किया जाता है एवं प्रातः सवन में युग्म देवताओं को अर्पित किया जाता है, आप.श्रौ.सू. 12.2०.19; बौ.श्रौ.सू. 7.12।

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