बहिष्पवमान
यन्त्रोपारोपितकोशांशः
[सम्पाद्यताम्]Monier-Williams
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पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्। |
बहिष्पवमान/ बहिष्--पवमान m. N. of a स्तोमor स्तोत्र(generally consisting of 3 त्रिचs and sung outside the वेदिduring the morning libation) TS. Br. S3rS. ChUp.
Vedic Rituals Hindi
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पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्। |
बहिष्पवमान न.
एक स्तोत्र का नाम, जिसका गायन प्रातःकालीन सत्र में सदस् से बाहर चात्वाल के निकट आस्ताव पर किया जाता है, ला.श्रौ.सू. 1.12.7। सोम-याग में गाये जाने वाले स्तोत्रों में यह प्रथम है और इसमें नौ विशिष्ट ऋचायें (तीन तृच) समाहित हैं ः ऋ.वे. 9.11.1-3; 64.28-3०; 66.1०-12 = सा.वे. II. 1.1.1-3; इनका गायन ‘त्रिवृत्’ (स्तोम) की शैली में किया जाता है; द्रष्टव्य-श्रौ.को. (सं.) II.278, 559।
