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बहिष्पवमान

विकिशब्दकोशः तः

यन्त्रोपारोपितकोशांशः

[सम्पाद्यताम्]

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

बहिष्पवमान/ बहिष्--पवमान m. N. of a स्तोमor स्तोत्र(generally consisting of 3 त्रिचs and sung outside the वेदिduring the morning libation) TS. Br. S3rS. ChUp.

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

बहिष्पवमान न.
एक स्तोत्र का नाम, जिसका गायन प्रातःकालीन सत्र में सदस् से बाहर चात्वाल के निकट आस्ताव पर किया जाता है, ला.श्रौ.सू. 1.12.7। सोम-याग में गाये जाने वाले स्तोत्रों में यह प्रथम है और इसमें नौ विशिष्ट ऋचायें (तीन तृच) समाहित हैं ः ऋ.वे. 9.11.1-3; 64.28-3०; 66.1०-12 = सा.वे. II. 1.1.1-3; इनका गायन ‘त्रिवृत्’ (स्तोम) की शैली में किया जाता है; द्रष्टव्य-श्रौ.को. (सं.) II.278, 559।

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