यज्ञायज्ञिय
यन्त्रोपारोपितकोशांशः
[सम्पाद्यताम्]Monier-Williams
[सम्पाद्यताम्]|
पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्। |
यज्ञायज्ञिय n. (fr. याज्ञा-यज्ञा, the beginning of RV. i , 168 , 1 )N. of various सामन्s (also called अग्निष्टोम-स्, from coming at the end of an अग्नि-ष्टोम) AV. VS. Br. etc.
Vedic Rituals Hindi
[सम्पाद्यताम्]|
पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्। |
यज्ञायज्ञिय न.
अगिन्-वेदि की पाँचवी तह के पुच्छ-भाग में लगी ईंट का नाम, भा.श्रौ.सू. 6.2.3.1; 1०.2.3.7; सभी प्रकार की पवित्र अगिन्यों का आधान (स्थापन) करते समय गाये जाने वाले साम का नाम, श्रौ.को. (अं.) 1.44; भा.श्रौ.सू. 5.6.11; एक स्तोत्र, अन्तिम एवं मुख्य, जिसका गायन अगिन्ष्टोम के तृतीय सवन में किया जाता है। इस का यह नाम स्तोत्र के प्रारम्भिक शब्दों ‘यज्ञायज्ञ’ के आधार पर पड़ा, आप.श्रौ.सू. 13.15.3. उद्गाता गायन का प्रारम्भ करता है; सभी गायक एवं गानमण्डली के सदस्य गायन के दौरान अपने शिर एवं कान ढक लेते हैं; यहाँ तक की इस दृश्य के दर्शक भी गायन में सम्मिलित हो जाते हैं, आप.श्रौ.सू. 13.15.6; मा.श्रौ.सू. 15.4.15. यजमान की पत्नी को सदस् में लाया जाता है और वह गायन के दौरान अपने जङ्घे के ऊपर पानी (पन्नेजनी) उड़ेलती है, श्रौ.को. (सं.) II.453; द्रष्टव्य-4.2.2०,21 सा.वे. 1.35 पर आधृत; श्रौ.को. (सं.) II.6, 592; इसमें ऋ.वे. 3.3; 3.33.1; 1.8.7; 6.48.1-2; 1.143; 1०.9.1-3; 6.5०.14; 5.46.7-8; 2.39.4-5; 6.44.7-9, 1०.15.1-3; 1०.14.4, 3,5; 6.47.1-3; 3.2०.4; 1.5.4.1; 1०.53.6; एवं 4.17.2० समाहित हैं।
