लोकम्पृणा
यन्त्रोपारोपितकोशांशः
[सम्पाद्यताम्]Monier-Williams
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पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्। |
लोकम्पृणा/ लोक--म्-पृणा f. ( scil. इष्टका) , N. of the bricks used for building the sacrificial altar (set up with the formula लोकम् पृनetc. , those which have a peculiar formula being called यजुष्-मतीSee. ) S3Br. TS. A1pS3r. Jaim.
Vedic Rituals Hindi
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पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्। |
लोकम्पृणा स्त्री.
लोष्टचिति के चयन के लिए प्रयुक्त ईंटों का नाम, बौ.श्रौ.सू. 1.14.16; वे ‘लोकम्पृण छिद्रं पृणो अथो- --’ इस मन्त्र से इस प्रकार चिनी जाती हैं कि ईंटों की संख्या 1००० हो (पहले से चिनी हुई प्रत्येक दिशा में 1०० एवं मध्य में 2०० ईंटों के सहित)। श्रौ.को. (अं.) 1.1०96, 699, 11०3; आप.श्रौ.सू. 16.14.9; वास्तव में इनका प्रयोग अन्य ईंटों के बीच में खाली स्थान को भरने के लिए होता है। ईंटों को मन्त्र के साथ भी योजित किया जाता है और इन ईंटों को यजुष्मती भी कहा जाता है (चयन)।
