वाग्यमन
यन्त्रोपारोपितकोशांशः
[सम्पाद्यताम्]Monier-Williams
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पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्। |
वाग्यमन/ वाग्--यमन n. restraint of speech , silence S3rS.
Vedic Rituals Hindi
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पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्। |
वाग्यमन न.
(वाचः यमनम्, यमन = यम + ल्युट्) वाणी पर संयम, वाक्संयम (मौन), जिसका पालन यज्ञों के विभिन्न स्तरों (अवसरों) पर अध्वर्यु, ब्रह्मा एवं यजमान को करना पड़ता है ः दर्श में प्रणीता-प्रणयन से लेकर ‘हविष्कृद्’ को बुलाने तक, आप.श्रौ.सू. 1.16.7-19.8. अध्वर्यु गाय दुहने से होम-पर्यन्त वाग्यमन का पालन करता है, का.श्रौ.सू. 4.14.31 (वाग्यतो दोहप्रभृत्याहोमात् क्षीरहोता चेत्)। आप.श्रौ.सू. 1.12.5 के भाष्यानुसार ‘वाचं यच्छति’ का अर्थ है मन्त्रातिरिक्त एक भी शब्द न बोलना। ब्रह्मा कर्मकाण्ड की सभी सेवाओं में मौनव्रत का पालन करता है, आप.श्रौ.सू. 3.18.6, अथवा उन सेवाओं में जिनमें (दूसरे ऋत्विजों द्वारा) मन्त्र का प्रयोग किया जा रहा हो, आप.श्रौ.सू. 1.12.7; भा.श्रौ.सू. 3.15.6 (वाचंयमः); का.श्रौ.सू. 2.2.2 (वाग्यत वाऽनुयाजप्रसवात्); भा.श्रौ.सू. 3.24. अध्वर्यु इसका पालन सोम० में दीक्षा के अङ्ग के रूप में करता है, बौ.श्रौ.सू. 6.5; इसका उल्टा है ‘वाचोऽवसर्गः’, द्र. - आश्व.श्रौ.सू. 1.5.35-37 एवं ‘वाचो विसर्जनम्’, शु.य.1.15।
