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सप्तहोतृ

विकिशब्दकोशः तः

यन्त्रोपारोपितकोशांशः

[सम्पाद्यताम्]

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

सप्तहोतृ/ सप्त--होतृ mfn. ( त-)having 7 sacrificial priests RV. VS. AV. etc.

सप्तहोतृ/ सप्त--होतृ m. pl. N. of partic. मन्त्रs TBr.

पृष्ठभागोऽयं यन्त्रेण केनचित् काले काले मार्जयित्वा यथास्रोतः परिवर्तयिष्यते। तेन मा भूदत्र शोधनसम्भ्रमः। सज्जनैः मूलमेव शोध्यताम्।

सप्तहोतृ पु.
सात मन्त्र ः ‘महाहविर्होता, सप्त हविरध्वर्युः, अच्युतपाजा अगनीत्, अच्युतमना उपवक्ता, अनाधृष्यश्च अप्रतिधृष्यश्च अब्जिगरौ अयास्य उद्गाता (तै.आ. 3.5), आप.श्रौ.सू. 4.11.7; बहिष्पवमान के पूर्व एक आहुति के साथ प्रातःसवन में यजमान द्वारा अश्राव्य जप (दर्श), आप.श्रौ.सू. 12.16.18; द्रष्टव्य-श्रौ.को. (सं.) I.128; यदि अगिन्होत्र के अनुष्ठान में दो-तीन दिन छूट जाए, तो जिस मन्त्र से आहुति दी जाती है उस मन्त्र का नाम, वैखा.श्रौ.सू. 2०.14-15. यदि कोई व्यक्ति सोम-याग का अनुष्ठान करने के बाद अप्रसन्नता का अनुभव करता है, तो वह मौनपूर्वक मन्त्र के ग्रहभाग का वाचन करते हुए आहुति दे सकता है, मा.श्रौ.सू. 5.2.14।

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